लाखीणा घोड़ा कोई ना करै रै थारो मोल।

लेवणिया कोनी रै कोरी बातां है कोरा बोल॥

भाठां की भड़भेठी में हीरा की चास कोइनी।

खच्चर नै खांड खोपरा, घोड़ा नै घास कोईनी।

नकली तो नम्बर लेइग्या असली की आस कोइनी।

ठोठी सब पास होइग्या, पढ़बाळा पास कोइनी।

परखिया कोइनी, रै असली-नकली रो कोइनी तोल।

भाव मत घटाइजे रै भोळा ताव मत घटाइजे।

छपरा नै छोड मत ना बंगलै बंध जाइजे।

अबळक की जात न्यारी, तो जात मत लजाइजे।

लाखां मे अेक है थूं तो लाग मत लगाइजे।

जर जेवर कोइनी रै, जीण पर कोइनी रै जरी को झोळ।

सगळा रईस नटग्या तो सगळा सईस नटग्या।

चतरंगी चाल देखी तो चत्तर असवार नटग्या।

घोड़ां की टाप सुणनै, काना का परदा फटग्या।

अणहोता मौल आगै, खुल्या में नकदी घटग्या।

भगती का फोड़ा रै अतरी नपती यो थारो मोल।

थारी असवारी करबो, कतरा असवार चावै।

कतरां कै लाळ टपकै, कतरां नै भटका आवै।

मुंडां कै ताळो जड़द्‌यो, माथो नीचो करवाय।

हठवाड़ो ठगां को, रै बीच बजारां मत डोल।

टोटो खालेणो पण ना खोटा कै हाथ बिकणो।

चांदी की चमक है धोखो तो सोना पर पालिस चिकणो।

मूंजी की पूंजी सातर, मरदां कै ठाण टिकणो।

खुद की किसमत को लेखो, खुद की कलमां सूं लिखणो।

सुहावण लागै रै, चौखा लागै रै दूर का ढोल।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : ब्रजमोहन सपूत ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 11
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