उगती रैयी अबखाई, अभावां रै गांव में।

छळती रैयी परछाई, कांटां री छांव में।

मिनखायत रो मोल कठै

माणसियै रो तोल कठै

गळी गुवाड़ी सजड़ किवाड़ी

फागणिया रस बोल कठै।

चुगती रैयी कोचरी च्यानणो ठांव में।

भींता चींत्या चितराम कठै

टोडा कीरत कमठाण कठै

गोखां की मूंछ मरोड़ गयी

पोळ्यां री राम-सलाम कठै

चुभती रैयी चालां कांकरां-सी पांव में।

धोरां धीरज धाम कठै

मीरां मोमल नाम कठै

राणा री आण तणी बातां

हळ्दीघाटी घमसाण कठै

बळती रैयी बास्तै काळजां रै घाव में।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : भगवतीप्रसाद चौधरी ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 13
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