हिवड़ै जिवड़ै रा हाल सुण, तनड़ै मनड़ै तौल।
कांई सांभळा कांई सुणा, कांई बोलां बोल॥
जबरी हूक उठै हिवड़ै में,
काया थर-थर कांपै।
नैणां उमड़्या समंद तळाव,
हिवड़ो हर-हर हांपै॥
इसी घड़ी में मिल्या सायबा, लाम्बा करगा कौल।
कांई सांभळा कांई सुणा, कांई बोलां बोल॥
सुख-दुःख दोवां ओळै-दोळै,
सुपनो बणगी जिन्दगी।
जीव जूंण सूं कैंया निकळां,
बैरी बणगी बन्दगी॥
कांई करां बगत रै आगै, माड़ा होगा डौळ।
कांई सांभळा कांई सुणा, कांई बोलां बोल॥
दुःख री कथना कथी न जावै,
जीव घणो अकुलावै।
आंख्यां में आंसूड़ा खळकै,
वाणी रुंध-रुंध जावै॥
दुःख अपणो झूंपो बांध लियो, देख हियै में पौल।
कांई सांभळा कांई सुणा, कांई बोलां बोल॥