आजकाळ
झूठा बेटां री तो
लंगर ही लागरी है
कुत्ती सूं परलै पार
अेकांतरै ई ब्यावण लागरी है
ठा कोनी, फेमिली प्लानिंग
निसक्रिय होय’र कठै दापळगी
आं झूठा बेटां रो जलम
राजनीति रै गरभ सूं होवै
अर बाप राजनेता
घूस री प्रिजेन्ट सूं
आखै जग में जसन मनावै।
मोटा मिनख लीकै
चाटूकार पोतड़ो चीकै
आस्वासना रो दूध पावै
लालच रो लाड लडावै
इस्यो भाग बिरला ही पावै।
भणाई अर संस्कृति माथै
अै लाडला कांई ध्यान धरै
सगळी योगतावां
आंरै आगै पाणी भरै।
प्रतिभावां?
बांरो तो झेदरकूटो ई कर न्हाख्यो
आं झूठा बेटावां।
चौकस देखल्यो भलां’ईं
कठै विभाग खाली कोनी
आंरै भलै करतबां सूं
डिगरियां?
डिगरियां बिचार्यां रो कांई डोळ
चिलम भरण में ईं औसाण कोनी
सारो भणाई काल गुजरग्यो
आं री ई चमचागिरी सूं।