जागो

मांग्यो सुख

मिल्यो दुखड़ो।

मांगियो चैन मिल्यो झगड़ो।

मांग्यो रस्तो

मिलिया राड़ा।

मांगियां सूं

मिलै कोनी

रेत भी।

खुद नै बणनौ पड़सी

बादळ

पाणी सारू।

खुद नै बणनौ पड़सी

चदण

खुशबू सारू।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : मदनमोहन परिहार ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-33
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