राजन लेल्यो फटफट गाडी, साजन लेल्यो फटफट गाडी

यूं मनवार करी सेजां में, लाडांकोडां म्हांकी लाडी।

ऊंकी मनवारां को धायो, लूणा अेक पुराणी ल्यायो।

जींका सब कळ-पुरजा बाजै, हॉरन बाजै नहीं बजायो।

लीरम-लीरा सीट हुयोड़ी, लटकै छी नारेळी डाढ़ी।

राजन लेल्यो फटफट गाडी, साजन लेल्यो फटफट गाडी।

हुयो गळी में म्हांकै चाळो, नयो हुयो छै पीसाहाळो।

सैकंड हैंड खटारौ ल्यायो, मन में इतरावै छै स्याळो

पण, जोड़ायत चढ़ा कड़ाई, पूवा तळ्या पकौड़ी काढ़ी।

राजन लेल्यो फटफट गाडी, साजन लेल्यो फटफट गाडी।

ऊंका दोन्यूं नैंणा खंजन, तिरछा तीर मनां का रंजन।

मिस्सी बिन्दी पौड़'र पोत्यौ, काननचारी सार्‌यौ अंजन।

भरली बाथ हाथ दे दोन्यूं, इतराई वा लदी पिछाड़ी।

राजन लेल्यो फटफट गाडी, साजन लेल्यो फटफट गाडी।

गळता कानी चल्या अगूणी, उतराया फेर घाट की गूणी।

पैदल का गैला नैं छोड्‌यौ घाटी नैं छोडी आथूणी।

वा बोली-कोड़ै ले चाल्या, कोड़ै रैगी मोहनबाड़ी।

राजन लेल्यो फटफट गाडी, साजन लेल्यो फटफट गाडी।

चालां ज्यूं गाडी लहरावै, प्लग में कदे कारबन आवै।

म्हे उतराधै जाबौ चावां, पण वा दिखणादै ले जावै।

क्यूं तो क्लच गीयर धोखो दे, क्यूं म्हे ठैर्‌या नया खिलाड़ी।

राजन लेल्यो फटफट गाडी, साजन लेल्यो फटफट गाडी।

आगै सुणो बात लालाजी, ज्यूं-त्यूं लिया घाट बालाजी।

गाड़ी पण चढ़बा नहीं देवै, पड़्या दोनुवां कै फालाजी।

चढ़ी हांफणी छाती धड़कै, सांसा की बाजै पीपाड़ी।

राजन लेल्यो फटफट गाडी, साजन लेल्यो फटफट गाडी।

नितकी ऊंमै पीसा घालां, आधा पड़दा पाळा चालां।

हाय कुमत का मार्‌या घर में, घोड़ो घाल्यो बैठ्या ठालां।

नितकी टायर पिंचर होवै, नित टूटै चक्का की ताड़ी।

राजन लेल्यो फटफट गाडी, साजन लेल्यो फटफट गाडी।

बोली—आछ्‌यो लियौ अटाळो, बाळो-बाळो आगी बाळो।

गाड़ी अर लाडी का मंझ मै, फंस्यो ‘बिहारी’ भोळो ढाळो।

लाडी राख, बेचदी गाडी, लेगौ झामनदास कबाड़ी।

राजन लेल्यो फटफट गाडी, साजन लेल्यो फटफट गाडी।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : बिहारी शरण ‘पारीक’ ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-31
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