धूजै लागो ढोलियो, चाली ताती पून।

टाबरिया सुसकै नहीं, घर में छाई सून॥

घर में छाई सून, सुहागण हथणी आई।

घूचरिया सा च्यार, भतीजा सागै ल्याई॥

बोल्यां काडै सींग, कहो, कुण जम नै पूजै।

कनक छड़ी को रूप, देख डूंगर भी धूजै॥

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : भगवतीप्रसाद चौधरी ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-17
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