एक आगणाँ मएं

भाई भाई पाए

नै बेतो है,

एक छोर नी

बणी भेतं मएं नै रेतो है

अटेलेस

स्यारी आडे़

आपड़ी नजरै

आपड़ थकी

थई रई हैं कारी

होरी मनावैं

आपड़ूस घोर बारी

नै आएं

तमे वो कै मुं

सब आपड़ाज

घोड़ा साईले बादं

मारू तारू करं

एक बीजा नै माखा फरं

घोर नु देवारु काडी

दीवारी करं

सब जुई

घोर ना आगणाँ नो

दीवो के,

मुँ बरूँ

अन्दारू पी

उजवारू करूँ

पण तमे

भाई-भाई

एक आगणाँ मएं

भेगा थई नै रो

केम थारी वारा मोग करो,

बीजू नै पण

अणा आगणा नी तो

सन्ता करो।

स्रोत
  • पोथी : वागड़ अंचल री ,
  • सिरजक : राजेश राज ,
  • संपादक : ज्योतिपुंज ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी ,
  • संस्करण : Prtham
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