झूठ ही हियै में प्रीत पाळता रिया

रात-रात बाट बांकी नाळता रिया।

च्यारूं-मेर फेर मीठी-मीठी बात है

लागै, होसी आजकाल मांय घात है

नीं कोई पिछाण रोज बावळा बणां–

अेक आदमी का रूप पांच-सात है।

क्यूं पड़्या-पड़्या ही जीव बाळता रिया

रात-रात बाट बांकी नाळता रिया।

कांई राज नै पतो बल्लू का बोल में

बेच दे राख नै सोनै का मोल में

फूंक-फूंक खूब पग बधाया बाद ही–

ठग्या गया रै बार-बार भाव-तोल में

मेळा बीच मान नै उछाळता रिया

रात-रात बाट बांकी नाळता रिया।

ज्ञान की घणीं किताबां बांचता फिरै

लाभ-हानि का सवाल जांचता फिरै

देता रैवै सीख रै जणां-जणां नै

अै– आंगळ्यां पै खुद नटां की नाचता फिरै

अेकला ही आप नै समाळता रिया

रात-रात बाट बांकी नाळता रिया।

रूंखड़ा खड़ा अबै कांटा का खेत में

भावना पंखेरू की रळी रे रेत में

आंसू आंख सूं झरै रै नित गरीब कै–

भोळा-भाळा भायला लूटै है हेत में

हंस समदरां सूं मोती टाळता रिया

रात-रात बाट बांकी नाळता रिया।

नाग जैरदार बोळा सैर में बसै

अै जगां-जगां सूं डील-डोल नै डसै

नोट की हुई जे ओट-खोट छुप गया–

सांच अर अहिंसा न्याय नेम पै हंसै

मालगाड़ी नै घरां उलाळता रिया

रात-रात बाट बांकी नाळता रिया।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : मुकेश आमेरा ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-27
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