नौकरी रो मतलब कोनी,

कै थे आंख दिखाओ।

मेज पर सीनो ताण नै,

पांख फैलाओ।

नौकरी रो अरथ है कै

हाथ जोड़ ल्यो।

कीं कड़तू मोड़ल्यो

गोड़ा री गांठा नै

थोड़सी तोड़ ल्यो।

फेर, दबेड़ै कुतियै री तरियां,

सै दांत खोलद्‌यो।

अफसर री गरिमा रो थे

पूरो घड़ियो ढ़ोळद्‌यो

आप महान हो,

मेरी जहान हो,

गुण री खान हो,

देश री शान हो,

और तो कांई कैवूं

धरती री आनबान हो।

फेर देखो, रंग आवसी

सारो समो बंध ज्यासी,

सुविधा रो आखो अंबर

थारै साथै समज्यासी

नीं तो खराब होवो ला

जमारो खोवो ला।

आदेश पर आदेश

जिन्दगी भर रोवोला।

थारी सी. आर. में खोटा

आंक लिख्या जासी।

बदळी रो हुकम

बेगो ही मिल ज्यासी।

और तो कीं कोनी,

पण टाबरिया रुळ ज्यासी।

पण थे जे करामात दिखाओ

कीं नेता रै पद स्यूं जुड़ ज्याओ।

फेर तो बेड़ा पार है,

क्यूं कै चमत्कार नै नमस्कार है।

या फेर कीं चलतै सिकूरै

नेता रा जुंवाई हो,

या कीं मंत्री रो पी.अे.

थारी लुगाई रो भाई हो,

या कीं जेब में चोखी सी,

रिश्वत री कमाई हो।

तो तो भाई मोज है,

फेर क्यां रो रोज है।

नागा होया नाचल्यो,

अफसर रै नाथ घाल'र,

जचा नै खींच ल्यो।

पण अेक बात और है,

काम करो तो मर ज्यासो।

टीबी रै कीड़ा में,

बूरी तरह फंस ज्यासो

फाइल नै खोल ल्यो

कलम नै तोल ल्यो।

काम वो ही करो,

जकै रो कीं मोलल्यो।

राज में सौ छेद है,

सगळा नै भेद है।

थारी इण हथकड़ी में

सारी जनता कैद है।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : करणीदान बारहठ ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 12
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