हर्‌या भर्‌या है रूंखड़ा

झाड़ी घेर-घूमेर,

उमड़-घूमड़ नै ओसर्‌यो

राम करी है मै’र।

पड़-पड़ बाजै पीपळी

बिरखा छेड़ी तान,

ताळी पटका कर रिया

दरखतियां रा पान।

झालो देवै खेजड़ो

सरवरियै री पाळ,

आवो हींडो तीजणी

म्हारी सैंठी डाळ।

सींजारा अर तीज रो

घणों सुरंगो साथ,

मौज मनावै तीजण्यां

हींडै भर-भर बांध।

तीज तिंवारां ऊतरी

हिवड़ै हरख अपार,

भाजी आवै देस मै

त्यूंहारां री डार।

गांव-गांव मेळा लग्या

ढाणी-ढाणी हाट,

मगरियै रै चाव में

टाबरियां रा ठाट।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : शिवराज भारतीय ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-27
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