तू

फेरै

छानी रेह्वा लागी गई

अेटले

के तू छानी रई सकै

पण म्हूं न्हैं

सांभर

तारी चुप

म्हारा हईया नै

ठेठ सुधी

चीरी नाखै है

आव

बैही जा

पाहै म्हारै

हाथ मअें लई हाथ

नै

म्हूं

सांभरूं

अबकै आणी छुट्टियं मअें

आपण गांम जई आंव।

स्रोत
  • पोथी : अपरंच ,
  • सिरजक : प्रदीप भट्ट ,
  • संपादक : गौतम अरोड़ा ,
  • प्रकाशक : अपरंच प्रकाशन
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