रे काछबा

थारी हिम्मत!

रेइजै थारी

खाल में

हुवै कुण थूं

फरक देखतो

मछलियां री

चाल में।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : कुन्दन माली ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 13
जुड़्योड़ा विसै