ज्यो भी छोड़ रग्या

धरती पै

नेकी का चतराम

काळ नै पाछै छोड़ ग्या।

जद बी वां को नांव

नजर्या कै सामै जावै छै

ऊकैर जावै छै

वां को सदरुप!

स्रोत
  • सिरजक : जितेन्द्र निर्मोही ,
  • प्रकाशक : कवि रै हाथां चुणियोड़ी
जुड़्योड़ा विसै