भाईचारै में कांण

जांणता-पिछाणता

आपां

बणां हां अजाण।

लागै

मिनखां रै

भाईचारै में

आयगी है कांण।

अेक

दूसरै सूं

भागां

आगा-आगा

ज्यूं

धोरां सूं बादळ।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : मदनमोहन परिहार ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-33
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