घराळी की त्योरी बदलेड़ी देख

मास्टर जी बोल्या–

‘इस्कूल में भू-भारती देखण-लागो,

जणांई कीं लेट होगी।

‘कुण है बा भू-भारती

म्हारी सौत; मरै कोनी।

अर रोटी भी बा’ई थानै देसी–

जकी बिना थानै सरै कोनी।

स्रोत
  • पोथी : हिवड़ै रो उजास ,
  • सिरजक : तारासिंह ,
  • संपादक : श्रीलाल नथमल जोशी ,
  • प्रकाशक : शिक्षा विभाग राजस्थान के लिए उषा पब्लिशिंग हाउस, जोधपुर
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