आंसू पूंछ सकै निरधन का।
दुखड़ा मेट सकै जन-जन का।
सेवक सांचा बणै वतन का।
याद राखै! ज्यो थे केवो।
भायां! बोट वानै देवो॥
आच्छो बसै देखो भाळो॥
पाछो आ, ज्यो करै सम्भाळो॥
अन्धारा में भरै उजाळो॥
वांकी नावां नै देवो।
भायां! बोट वानै देवो।
कोरा दे ज्यो लांबा भासण।
जीत न पा लेवै जद आसण।
खांचै केस बणै दुसासण॥
वांकी बातां में मत बेवो।
भायां! बोट वानै देवो।
सुण सकै दुखड़ो दिल्ली तक।
राखै निजर ज्यो गांव गळी तक।
ज्यो दौड़ै कोरी कुरसी तक।
सत्ता लौलुप नै मत सेवो।
भायां! बोट वानै देवो।
सीधो, सांचो देज्यो त्यागी।
गरीबड़ा रो हूवै अनुरागी।
जीनै लगन सेवा की लागी।
वानै मत दे माथै लेवो।
भायां! बोट वानै देवो॥