सुणो हो के!

चालो आपां कोर्ट में

तलाक ले ल्यां

में शहर की

थे गांव का

निर्भाव कईयां होवैगो।

स्याणी!

पैलां थारलै

ताऊ नै तो पूछले

ओजूं मांडो रूप्या

कुण सै शहरी का

पग धोवैगो।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : भगवतीप्रसाद चौधरी ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 12
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