मैली चूनड़ी

कुंवारै माण्डै की

सरायां नै कैयो

थे तो कोरी हो

थानै के बेरो

अपमान के होवै।

आंख में पाणी भर कर

उत्तर दियो सराई

भैण!

थारली दशा नदेख कर

म्हारै काळजै में

कोचका होग्या।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : भगवतीप्रसाद चौधरी ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 11
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