अेक दिन हूं

मण्डी सूं

काळी मिरचां री बानगी लायो,

घरां जाय

पुड़की नै खोल’र चाखी

टाबरां नै भी चखाई

पण–

चरपरी कोनी लागी।

इतरा में

पिणघट सूं घराळी आयगी

बा चाख’र बोली–

हिया फूटा नै–हिया फूटा मिल्या होसी,

जठा सूं–

काळी मिरचां री बानगी लाया

बो–किराणा भण्डार री बजाय

कृषि विभाग रो ‘पपीता बीज भण्डार’ हुसी।

स्रोत
  • पोथी : हिवड़ै रो उजास ,
  • सिरजक : केशव ‘पथिक’ आचार्य ,
  • संपादक : श्रीलाल नथमल जोशी ,
  • प्रकाशक : शिक्षा विभाग राजस्थान के लिए उषा पब्लिशिंग हाउस, जोधपुर
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