सुरसत तूं वर दे!

बीण बजाणी, च्यानण करणी

ग्यान जोत सूं जग नै भरणी

जग मग जग कर दे।

मन रो मळ खो, तन रो बंधण

भेद भाव खो, वारूं तन रो बंधण

भारत पै झट दे।

मंगळ पथ दे, पुण्य वचन दे

झूठा जग जंजाळ फंद सूं

सुळझण री बुध दे।

नूंवा भाव भर, नूंवो ग्यान भर

प्रेम डोर सूं जगत बांध कर

बिचरै जन वर दे।

नूंई सांस दे, नूंई आस दे

सत री जोत जगत में भर दे

अभ्यूदय कर दे

सुरसत तूं वर दे।

स्रोत
  • पोथी : जलम भोम ,
  • सिरजक : उदयवीर शर्मा ,
  • संपादक : मूळचंद 'प्राणेश' ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी भाषा प्रचार प्रकाशन, बीकानेर (राज.) ,
  • संस्करण : 2-3, जून-दिसम्बर
जुड़्योड़ा विसै