अनुवाद : रमाकान्त शर्मा
अबै जदै भी
कविता नै लेय'र
आलोचना करौ म्हारी
तौ
झांगुर री फड़फड़ाती पांखड़ियां
नै ई थामजौ
उण माथै लगाइजौ औ दोस
कै वौ झणकारै क्यूं है?