अबै जदै भी

कविता नै लेय'र

आलोचना करौ म्हारी

तौ

झांगुर री फड़फड़ाती पांखड़ियां

नै थामजौ

उण माथै लगाइजौ दोस

कै वौ झणकारै क्यूं है?

स्रोत
  • पोथी : रसूल अमजातोव अर विदेसी कवितावां ,
  • सिरजक : गाम डवनपोर्ट ,
  • प्रकाशक : रॉयल पब्लिकेशन, जोधपुर ,
  • संस्करण : प्रथम संस्करण
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