अहंकार छोड़ दे मानव

मानवता अपणा ले रे

लड़बो भिड़बो अड़बो चिढ़बो

मनखपणा को काम नहीं

आपण न्याळा-न्याळा सदां

अेक आपणो देस छै

राम की यां जलमभौम छै

रावण को य्हां काम नहीं

मीरा होई प्रेम दीवानी

मंथरा को नाम नहीं

नठा मली आजादी आपां

अब ईं नै संभाळल्यां

हल-मल’र रैवां सदां

अब ईं नै संवारल्यां

देस सूं हैत करां छा आपण

परदेसां सूं काम नहीं

हठ सूं हटकर आपां देखां

देस प्रेम की भासा नै

देस आपणो बढ़र्‌यो नत दन

छूर्‌यो छै आकास्यां नै

ईं मं आपां मौज करां

मस्ती की कोई बात नहीं

करसावां को देस प्यारो

देस मं प्यारो राजस्थान

अेक आडी छै चम्बल नदी

अेक आडी छै रेगिस्तान

करसा छो तो करो रे हाको

खालिस्तां को नांव नहीं।

स्रोत
  • पोथी : कवि रै हाथां चुणियोड़ी
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