रात चांदणी थारै खातर

अजै अमावस म्हारै खातर

हळवां-हळवां चालै सांसा

मारग मांय उजारै खातर

सुपनो म्हारो है बरसां सूं

लाणी पायल वां रै खातर

पेली पोथी आई जद सूं

ऊमड़ै नेह लिखारै खातर

कमजोरां री कठै सुणाई

दाबै साब उतारै खातर।

स्रोत
  • पोथी : कवि रै हाथां चुणियोड़ी ,
  • सिरजक : योगेश व्यास ,
  • प्रकाशक : कवि रै हाथां चुणियोड़ी
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