वतन वास्ते जीणो-मरणो मोट्यारां

जनमभौम को लेलो शरणो मोट्यारां॥

आपणे खातर तो सब जीवे जगती में-

सेवक बण भवसागर तरणो मोट्यारां॥

करो काम अस्या कै लागे जैकारा-

पाप-पुन्न को करलो नरणो मोट्यारां॥

मेणत सूं मझलां चाल हामी आवे-

नीतर पड़ै जगत मं फरणो मोट्यारां॥

टोळी मूं हरण्यो जद बिछडै भाईला सूं-

पड़ै एकली चारो चरणो मोट्यारां॥

बना लड्यां रण मं हार मती मानो-

जगां-जगा पे यूं कांई डरणो मोट्यारां॥

भूखा-तिरस्या,अबाणा, भटको हो कांटा-भाटां मं-

बस थोड़ो आगे बेहतो झरणो मोट्यारां॥

बण्यो-बणायो सीरो मलसी मत होचो-

ज्यो करणो सो थाने करणो मोट्यारां॥

नरसी ज्यूं विसवास, भरोसो भारी है-

नानी बाई चितोडगढ़ मायरो भरणो मोट्यारां॥

स्रोत
  • पोथी : जागती जोत ,
  • सिरजक : नंदकिशोर 'निर्झर'
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