दांतां मांय जीभ जुगत ज्यूं, आज भायला रैणू पड़सी।
काम काढणू चावै है तो, बाप गधै नै कैणू पड़सी।
न्याय नेम रा रूंख सूकगा, ठूंठ डाळियां घुघ्घु बोलैं।
सूरज सागै बैर जनम को, रात अंधेरी आंख्यां खोलै।
जबरै की है जोरा जबती, हीणै जण नै कठै गायला।
आज जीवणूं चावै है तो, तूं बणज्या किलकांट भायला।
पीठ उघाड़ी पेट पताळां, छाती के बळ कद तक लड़सी।
दांतां मांय जीभ जुगत ज्यूं, आज भायला रैणू पड़सी।
काम काढणू चावै है तो, बाप गधै नै कैणू पड़सी।
बिना चढावै दरसण दोरा, पटवारी पट खोलै कोनी।
पड़दै भीतर हाकिम बैठ्यो, भेट दियां बिन बोलै कोनी।
भरी कचेड़ी घूस घूघरी, धोबां धोबां झोळी भरर्या।
उळझ्योड़ी नै चोकस उळझाकर, अै सोळी नै ओळी करर्या।
बडबेरी की ज्यूं झड़कावैं, गरीब बापड़ो कद तक झड़सी।
दांतां मांय जीभ जुगत ज्यूं, आज भायला रैणू पड़सी।
काम काढणू चावै है तो, बाप गधै नै कैणू पड़सी।
धन्नू चावै बा हो ज्यावै, दोनूं सोच कयां के होग्यो।
बैं को गंडक दूध सूड़कर्यो, अैंको टींगर भूखो सोग्यो।
परजातंत्र कै पैहरै मांय, बोटां खातर खाट कढा दें।
जातवाद को नारो देकर, बामण, ठाकर, जाट लड़ादे।
अलवाड़ा सूं राम डरै है, जोर जुलम नै सैणू पड़सी।
दांतां मांय जीभ जुगत ज्यूं, आज भायला रैणू पड़सी।
काम काढणू चावै है तो, बाप गधै नै कैणू पड़सी।
तूं डिगरी कै बोझ मरै है, पढ़-पढ़ पोथ्यां आंख्यां फोड़ी।
फूल-फूल नै डोफो होग्यो, जद कोई तुकबंदी जोड़ी।
पाळ न पायो पेट भलांई, जोड़ न पायो काणी कोड़ी।
बिना पढ्योड़ा राज करै है, बणगा लक्खी और किरोड़ी।
इब पिछता मत, बैतो आयो बैं गैलैई बैणू पड़सी।
दांतां मांय जीभ जुगत ज्यूं, आज भायला रैणू पड़सी।
काम काढणू चावै है तो, बाप गधै नै कैणू पड़सी।