मिंदर रै कनै तो दूर

ना बिठाओ थे मिंदर री बाड़ कनै

अब थे हरिजन कैवो मोकळो

नाम लियो जद हरि रो

म्हारी जीभ ली थे बाढ

अब थे हरिजन कैवो मोकळो

नाम सुण्यो जद रहीम गो

म्हारै कानां में घाल्यो थे तेल

अब थे हरिजन कैवो मोकळो

मिंदर रै सारैकर टप्यो म्हैं

जद कैयो तू चाल अठै स्यूं

तू है अछूत

अब थे हरिजन कैवो मोकळो

आज थे कैवो

म्हे थारी सवामणी खावां

बोधि कैवै अब म्हे थारै मिंदर कोनी जावां

अब थे हरिजन कैवो मोकळो

अब थे हरिजन कैवो मोकळो।

स्रोत
  • पोथी : कवि रै हाथां चुणियोड़ी
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