राजस्थानी, राजस्थानी नै चांस नीं देवै

 

सुरेस राजवंसी, अेक अैड़ौ नांव, जिकौ के लारलै पंदरै बरसां सूं हिन्दी फिलम-जगत में गायक रै रूप में स्थापित होवण सारू संघरससीळ है। स. मोहम्मद रफी नै गुरू अर आदरस मांन’र वां रै ई लहजै, तरीकै अर हूबहू आवाज में गावण रै कारण सुरेस गायन रै छेत्र में अबै काफी व्यस्त है। पैंतीस बरस री उमर रा सुरेस मूळरूप सूं बीकानेर रा है। अेडवौकेट पिता री डांट-फटकार अर ठुकाई ई संगीत अर गायन रै प्रती लगाव नै रोक नीं सकी अर किस्मत खींचनै बंबोई लेयगी।

 

‘माणक’ सारू आ भेंट-बारता कीवी है प्रकास पुरोहित

 

प्रकास पुरोहित : आपनै गायन रौ सौक कद सूं लागौ? कांईं आप इणरी विधिवत तालीम हासल करी?

 

सुरेस राजवंसी : गायन रौ सौक तौ बाळपणै सूं लागगौ हौ अर म्हैं इणनै भगवांन री देन मानूं।

 

म्हैं हिन्दुस्तांन रै लगैटगै सगळै ई बडै स्हैरां में स्टेज-प्रोग्राम कर्‌या है, जिणां में बडै बडै गायक-गायिकावां अर संगीतकारां साथै सैंग तरै रा गीत गाया है। अर औ सिलसिलौ तौ आज ई जारी है। इणरै अलावा अेच. अेम. वीं रै वास्तै गैर फिलमी गजलां अर कन्हैयालालजी सेठिया री चावी कवितावां ‘धरती धोरां री’ अर ‘अरे घास री रोटी ई जद’ री अेक ई. पी. रिकार्ड ई निकळी है। विंयां म्हनै राजस्थांन में जद ई प्रोग्राम देवण रौ पड़ियौ, अठै रै लोगां सूं अच्छौ ‘रेसपोंस’ मिलियौ।

 

प्रकास पुरोहित : गायन रै छेतर में आप आपरी खास उपलब्धी किणनै मांनौ?

 

सुरेस राजवंसी : प्रधांनमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी रै बीस सूत्री कार्यक्रम माथै म्हैं बारै मिनट री अेक ई.पी. रिकार्ड बणाई। वा रिकार्ड म्हैं खुद प्रधांनमंत्री नै भेंट करी। इणरै अलावा म्हारै गायोड़ै राजस्थानी भासा रै दस ‘डिस्को’ गीतां री रिकार्ड आकासवांणी कंपनी निकाळ्यौ। अै दोनूं म्हारी खास उपलब्धी है।

 

सुरेस राजवंसी : फिलमां में ई गावतै रैवण री कोसिस रौ कोई खास मकसद है?

 

प्रकास पुरोहित : हां खास मकसद तौ है ई। म्हैं जनता रौ गायक बणणौ चावूं। धन कमावणौ म्हारै खास मकसद में नीं है। विंयां फिलम जगत में किणीं ई सारू कोई ‘गारंटी’ या ‘स्योरिटी’ नीं है, क्यूंकै अठै नीं तौ अच्छौ चालै अर नीं बुरौ, बल्कै भाग्यसाळी ई चालै।

 

सुरेस राजवंसी : फिलमी गायन सारू सास्त्रीय संगीत नै आप कित्तौ जरूरी मांनौ?

 

प्रकास पुरोहित : सास्त्रीय संगीत रौ ग्यांन तौ होवणौ चाहिजै, पण ज्यादा सास्त्रीय संगीत में जावण सूं आवाज री मिठास खराब हो जावै, अर फिलमी पारस्व-गायक री आवाज पकड़ सूं परै हो जावै, जद’क अेक गायक नै आपरी आवाज री ‘रेंज’, ‘डेप्थ’ अर पकड़ माथै ई ध्यांन केन्द्रित करणौ चाहिजै।

 

प्रकास पुरोहित : फिलम उद्योग में राजस्थानियां री स्थिति कैड़ी मांनौ?

 

सुरेस राजवंसी : ठीक-ठीक ई। स. गुलाम मोहम्मद, स. सिवराम, महिपाल, भरत व्यास, बी. अेम. व्यास, सलेसकुमार, बोहरा ब्रदर्स इत्याद केई नांव है, जिका के फिलम उद्योग में आपरी अर आपरै प्रांत री पिछांण बणाई। पण अबै स्थिति वैड़ी नीं रैयी अर नीं ई नवा लोगां में कोई खास स्थिति बणाई है।

 

प्रकास पुरोहित : फिलम उद्योग में लागोड़ा राजस्थानियां रै बारै में आपरी कांईं राय है?

 

सुरेस राजवंसी : आ ई के अेक राजस्थानी दूजै राजस्थानी नै ‘चांस’ नीं देवै, क्यूंकै उणनै ओ डर रैवै के कठैई वौ लारै नीं रैजा अर दूजौ आगै नीं बढजा। इणनै टांग खींचण वाळी बात ई कैयी जा सकै। इणी कम में म्हैं अेक बात खुदरी तरफ सूं ईं कैवणी चावूंला के राजस्थांन सरकार रौ कोई प्रोत्साहन नीं मिलै, इणी वजै राजस्थानी भासा में फिलमा नीं रै बराबर ई बण पा रैयी है। जिकी थोड़ी-बौत फिलमां बणै ई है वै इण वास्तै सफळ नीं हो सकै के राजस्थांनी भासा में अेकरूपता नीं है। आपां सगळां रै ई इण दिसा में विसेस ध्यांन दियां ई पार पड़सी।

 

प्रकास पुरोहित : विंयां आपरौ कोई खास मकसद?

 

सुरेस राजवंसी : विख्यात होवणौ ई म्हारौ पैलौ अर छेहलौ अर खास मकसद है। म्हनै विदेस जावण रा ई केई मौका मिल्या, पण म्हैं नीं गयौ, क्यूंकै म्हैं खुद नै अजै तांईं परतीसठीत नीं मानूं। इणीं तरै म्हैं म्हारै जलम स्थळ बीकानेर तद तांईं नीं जावूंला, जद तांईं के अेक अच्छै अर लोकचावै गायक रै रूप में फेमस नीं हो जावूं।

स्रोत
  • पोथी : माणक (पारिवारिक राजस्थांनी मासिक) ,
  • सिरजक : सुरेस राजवंसी सूं प्रकास पुरोहित री बंतळ ,
  • संपादक : पदम मेहता ,
  • प्रकाशक : माणक प्रकाशन
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