सारै जग री छोड़ी लाज

वां का माथा माथै ताज

चोर उचक्कां री औकात

बणिया है सगळा सरताज

डाळां-डाळां पातां पात

बैठा मोटा-मोटा बाज

पंडित मुल्ला समझै

थारो राज म्हारो राज

राही बणिया है अणजाण

सुणनै सिक्कां री आवाज

स्रोत
  • पोथी : राजस्थली लोकचेतना री राजस्थानी तिमाही ,
  • सिरजक : अब्दुल समद राही ,
  • संपादक : श्याम महर्षि ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी साहित्य-संस्कृति पीठ