पिचक्या गाल, होट कंवळाया

गांठ-गूदड़ा कठै गमाया?

धूणी सैंग तापता आया

आंच बिना कुण हाथ तपाया?

दरद डील रौ, घाव हियै रा

छाना राख्या, चवड़ै आया।

टूंडै में उतर्या कितरा

कुण मोती कुण माटी लाया?

थां तौ थाक गया आधेटै

हाल घणा अळगा है ठाया।

कांई हासल म्हां कर लीयौ?

थांरै गायां-गायां गाया।

स्रोत
  • पोथी : जागती जोत ,
  • सिरजक : सत्येन जोशी ,
  • संपादक : भगवतीलाल व्यास
जुड़्योड़ा विसै