नया साल में नूईं बाताँ या मंसा छै

भलाँ सबी सूं भर-भर बाथां या मंसा छै

म्हाँ की रातां टाट सरीखी पण ओरां की

हो ज्या रेशम-रेशम राताँ या मंसा छै

चांदी अर सोनाँ का हो ज्या, सबका घर में

बरतन भाँडा थाळ पराताँ या मंसा छै

अणपरणी बैठी हो बेट्याँ, ज्याँ का घर में

वाँ के आवै, राम-बराताँ या मंसा छै

सुख सूं साल, सबी को बीतै, रामू भय्‌या

मीठी खातां और खिलाताँ या मंसा छै

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : रामेश्वर शर्मा ‘रामूभैया’ ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशक पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 22
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