मतळब सूं वै बात करै

बिना गरज कद बात करै

फगत लूण की पो देवै

साची कदै बात करै

घर की मण ने पाव बता

दूजां की मण बात करै

उमर साठ बरस की हुगी

परणीजण री बात करै

किण री मां अजमों खायो

ऊंदी स्सै बात करै

घर में मिनकी बणणियां

मूछ्यां बट री बात करै

गया बुझावण सिळग्योड़ी

पूळो न्हांक’र बात करै

मिनखपणों मरियोड़ो है

कद मिनखां सी बात करै।

स्रोत
  • पोथी : जागती जोत फरवरी-मार्च ,
  • सिरजक : पवन पहाड़िया ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर
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