कहणो म्हारो मान भायला,

पारख करणो जाण भायला।

सोच समझ कर बातां बोल,

भींता कै भी कान भायला।

थारो खेत चरेगा डांगर,

मत सो खूंटी ताण भायला।

है भीड़ तो आणी-जाणी,

मतलब रो है झ्यान भायला।

मीनख जूण ल्याळी रो मूंडो,

किंया करां पिछाण भायला॥

किंया हेज हिये रो सूख्यो,

तूं भी धर कीं ध्यान भायला॥

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : चन्द्रसिंह चेतन ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-27
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