कांई होग्यो भाईला यो हाल थारा गांव को
लूट लेग्या चोरड़ा सब माल थारा गांव को।
दूध की नद्यां बहावै पेट जनता को भरै
फेर क्यूं करसाण है कंगाल थारा गांव को
और पे मत कर भरोसो आपणी तागत बढा
कोई न्हँ सुळझावेगो जंजाळ थारा गांव को।
काम प्यारो आदमी को चाम प्यारो कोई नै
काम सूं चमकेगी भाया भाल थारा गांव को।
कीमतां हर चीज की आकास नै छूरी मगर
घट रियो है भाव क्यूं हर साल थारा गांव को।
हाडक्या तो थूं गळावै रात-दिन मेहनत करै
ले उडै सब फायदो दल्लाल थारा गांव को।
‘भाईला’ की बात को मत भाईला मानो बुरो
देख कै हैरान हूं बदहाल थारा गांव को।