झूठौ झांसौ, फेर किता दिन

रुळपटरासौ, फेर किता दिन

मे’ल हवारा ने बातां रौ

चट-चौमासौ, फेर किता दिन

भोळी-भाळी जनता नै औ—

मीठौ-घासौ फेर किता दिन

किण वेळा कंई हुय जावण रौ

मन में सांसौ, फेर किता दिन

भूख, गरीबी अर विपदा रौ

इण घर वासौ, फेर किता दिन

सगळा नै यूं देता रौ’ला

कूड़ दिळासौ, फेर किता दिन

इण आंगणियै राजनीत रौ—

खेल-तमासौ, फेर किता दिन

स्रोत
  • पोथी : जागती जोत अप्रैल 1980 ,
  • सिरजक : श्यामसुन्दर भारती ,
  • संपादक : सत्येन जोशी ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर
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