गिगन घटा घनघोर फिरै

झिरमिर झिरमिर मेह झरै

मोर पपीहा बागां में

बरसातां री बात करै

बाळपणै री आवै ओळ

जद कागद री नाव तिरै

पंथी औंसे ओंसे चाल

कोई जोवै बाट घरै

साजन री मीठी बातां

गोरी सोच’र लाज मरै

अब तौ बेगा आइजौ जी

अब तो थां बिन नहीं सरै

स्रोत
  • पोथी : आंगणै सूं आभौ ,
  • सिरजक : कविता किरण ,
  • संपादक : शारदा कृष्ण ,
  • प्रकाशक : उषा पब्लिशिंग हाउस ,
  • संस्करण : प्रथम
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