ऊग्यो सूरज ढळ जावैला

जबरो तन गळ जावैला

चेतो राखै मिळ मिनखां सूं

नीतर कोई छळ जावैला

अगनी सूं नित अळगो रइजे

नीतर तनड़ो जळ जावैला

फळ सारू थूं नित दे पाणी

नींतर दरखत बळ जावैला

शिक्षा सागै दीक्षा दीजै

नींतर टाबर खळ जावैला।

स्रोत
  • पोथी : कवि रै हाथां चुणियोड़ी
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