लाकड़िया!

म्हारी छियां काट

म्हनै निफला देखण री पीड़ सूं

छूटौ कर।

म्हूं आरसिया में घिरियोड़ो क्यूं जलमियो?

दिन म्हारी परकम्मा करै

अर रात अपणां तारां में

म्हारौ चितरांम बणावै

म्हैं खुद बिन देख्या पांण

जीवणौ चावूं

अर म्हैं सपनौ देखूंलौ कै

कीड़ियां अर गिरजड़ा म्हारी पत्तियां अर चिड़कल है

लाकड़िया!

म्हारी छियां काट

म्हनै निफळा देखण री पीड़ सूं

छूटौ कर।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : फेदेरीको गार्सिया लोर्का ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : प्रथम संस्करण
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