जतनो ऊंचो जलम्यो उसूं ऊंचो नांव कियो
मेवाड़पति प्रताप नं मेवाड़ को ऊंचो नांव कियो
मेवाड़ कुळ, मेवाड धरा कुटंब रूखाळो आयो
महाराणी जैवंता नं मेवाड़पति छै जायो
अरे! धरा पधार्यो वीर नर धरम बचाकर का’णै
लुळ-लुळ आयो बादळो धरती पे छाबा का’णै
धरती पे छांव कियो।
अेक-अेक राजा छा आया अकबर का चरण मं
राणा कदै नं आयो पण दुसमण की शरण मं
अरे! संधि को संदेसो भेज्यो दिल्ली की सरकार नं
पण राणा नै ना भाव दियो
जमाभाटो मना के हार्या
मान्यो ना अेकलिंग पुजारी
अेक वार मं उड़ावै
तलवार चलावै दूधारी
अरे! मेवाड़ रियासत म्हारी छै मूंछ्यां पै ताव दियो
हळ्दीघाटी जुद्ध मं राणा गाठो जुद्ध कर्यो
मानसिंह मुगला रो राणा झट मं मान हर्यो
मरदाना हाथी का मस्तक चेतक पांव धर्यो
मानसिंह बड़भागी बचग्यो, बचतो-बचतो मर्यो
अरे! बायरा का वेग ज्यूं राणा नं वार कियो
अकबर पंछीड़ो बण हैर्यो
पण पार नं पायो राणा को
राजपूत गुलाम बणै
पण बणा नं पायो राणा नं
अरे! मरबा पै राणा कै अकबर झुक-झुक नमन कियो।