माडा सुण रे अंगरेज मनावै।
गाढा तैं कीधा गरट॥
आचां लीह गहै मति आडा।
हाडा अब तो छोड हट॥
तैं घण दुरंग काढि या ताळा।
मत बाळा करि घाणमथाण॥
बार बार फेरै बिसटाळा।
चाळा मति मांडे चहुवाण॥
पतसाही फुर माण म पेले।
झेले मति बोह तो झग॥
माथौ किम धूणै महाराजा।
आजा साहब तणै अग॥
इम बोलै मूंछां आवळतौ।
बळवंत चख झळतौ मजबूत॥
खेटा परवै जणी धन खायौ।
राणी नहं जायौ रजपूत॥
सुणतां इम ताणीया घांसाहर।
कोटा लग छबिया कटक॥
ऊभा पगां न देसी ईजत।
रिवताळौ लेसी रटक॥
बज तासा लूंबे घण बाहर।
मांडे आहर मार मुख॥
थळ पाटण तीरथ विच थाहर।
रुपियौ नाहर तणी रुख॥
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तोपां झळ मंगळ तणतांल॥
कुण गंजै बळवंत कजाकी।
डाकी सझ ऊभौ डाढाल॥
धर छती पर सेन धकावै।
ताई घण खावै तड़फ॥
साम्हौ कुण आवै सांफलबां।
हाडौ जम वाली हड़फ॥
पहर सात गोलां जुध पढियौ।
रावण-रढ रढियौ जमराण॥
आवण काम खाग ऊकढियौ।
चीता जिम कढियौ चहुवाण॥
सुत धौंकल फतमाल सहेतो।
धव ग्रहियां भुज सार॥
सहर हाज पचियौ चहुँ सूरां।
बाट बाट खागा बौपार॥
भभकै घाव ऊछटै भेजा।
तूटै धड़ नेजा तड़क॥
बेराहर पाडै दळ बारा।
धारा तीरथ तणी धक॥
पलटै जठी धकावै पैलां।
गैलां खग वाहै गजर॥
दळ चौकस चहुँ वैबल दावै।
आवै आवै कहैं अर॥
हल चल नरां हैमरां हड बड।
झड़ फड़ पंखण तोप झग॥
बहादर सुतन हाक जुध बागां।
लड़ियौ खागां पहर लग॥
चामल नीर श्रोण रँण चाढे।
पड़ियौ दल पाड़े पचरंग॥
खलरूढां बूढौ झड़ खागां।
वल छूटौ तूटा उतबंग॥