मैं दीवड़लो म्हारो तो बळणो ई म्हारी मुळकण बाजै!
गुण मानूं हूं थारो,
म्हारो तातो-तपतो थे तन देख्यो,
गुण मानूं हूं थारो,
म्हारो पीड़ घिर्योड़ो थे मन देख्यो,
करुणाळो बो साद थारलो
मुळकावो हो कितरो यारो!
मैं दीवड़लो, म्हारो तो बळणो ई म्हारी मुळकण बाजै!
सगळो म्हानै ठा है–
पुतळ्यां में दिवलां री लौ लैरावै
सगळो म्हानै ठा है–
होठां रै ऊपर बाती चस ज्यावै,
घणी ऊजाळण वाळी
मुळकां नै भी सावळ जाणूं हूं,
तम री बांहड़ल्यां में जाण्यो, जिको म्हारलो साथी बाजै
मैं दीवड़लो, म्हारो तो बळणो ई म्हारी मुळकण बाजै
बळ-बळ करियां जावूं
म्हारै सुपनां रै घर में च्यानणियों,
मन-चितराम ऊजाळूं म्हारा
जिणनै कुण बैठ्यो जाणणियों,
पण ओ तो मन नै ठगणो है
देखो, देखां बळै के लौ में,
भांवै चावै ज्यूं बण ज्यावो, म्हारो-उणरो मिटणो बाजै!
मैं दीवड़लो, म्हारो तो बळणो ई म्हारी मुळकण बाजै!
किणनै पंथ’र किणनै सा’रो
मिल्यो अठै ऊजियाळा म्हारा!
कुणसो करै गुमान जठै है
सूरज, चांद, अकरपण तारा!
म्हारी काळी-रेख जुगाड़ो,
इणमें मिनखपणो है म्हारो,
इण में ई इतिहास थारलो, पाणो है थानै, क्यूं भाजै!
मैं दीवड़लो, म्हारो तो बळणो ई म्हारी मुळकळ बाजै!