जवन आगि भटके घरौ साहिजहां जीवतै
चढै चमंके मेदनी वागि चालौ।
दळ तणा मुदाइत घणा पौह डोलतां
काम रौ मुदाइत हुओ कालौ॥
साहिजादां चिहुं आप कलि साल ले
बागि सायां मिलण हुवै बाथै।
नीसरै उमेर दिली रे नाखियो।
मेधावत झालियौ भार माथै॥
उजेणी खागि पहले किले आवधे
घणां हिंदू तुरक छात घाया।
रतन रिणि रहै राजधरम राखियां
अवर राजा प्रजा होइ आया॥