हेलीऽऽ भीतर भंवै है अणहद नाद
बोल्यां भिजोग ऽऽ पड़ै।
सारंगी संग सबद उचरै
लुळ-लुळ नाचै गीत
बांसरी री बात सुरीली
संग पुराणी रीत॥
हवळा-हवळा थूं बतळाजे अे
भीतरऽऽ राग भंवै।
डैरूं डमरू झांझ मंजीरा
इकतारै री ताल
बाजै हेली जी मुळकणा
माळी हेली ना लखै तो
लखवण दीठ दिराय।
जोत-जोत सूं दीखसी हेली
ग्यान जोत फिराय॥
भीतर नै बोली दीजे अै
वो थारै संगऽऽ जीवै।
भीतरऽऽ राग भंवै।