आगण ऊभो आज बंसत

धरती रो परदेसी कत

फूल्या फूल बिछाया पथ

के जाणै माटी मुळकै रे

माटी मुळकै रे माटी रा माटी कुदरत पुळकै रे

माटी मुळकै रे

कवळी-कवळो तीतर्‌या अै रग-बीरगी डोलै

नाजुकडी कळिया राघू घट भवर हठीला खोल

कोयल गाय बसती गीत

आयो आज मदन रो मीत

पाळी घणी पुराणी प्रीत

कै रम की गागर छळकै रे

गागर छळकै रे गाठगठीली होगी घुळकै रे

माटी मुळकै रे

आगै आगै पतझड़ आयो सारी गैल बुहारी

लारै लारै फागण ल्यायो चम्पाई पिचकारी

कीन्ही मनमानी रुतराज

रूठी राधा मनगी आज

बैरण लाजा मरगी लाज

के ड्योढी व्हैगी लुळकै रे

डबोढी व्हैगी रे वायरियो भीणो पखी झलकै रे

माटी मुळकै रे

देक सहेल्या री वाडी मे लुक-छिप तीन्यू खेलै

चोर बणा दीन्हो मथ देवर भाभी भेळ

हिवडै लेय हिलोळा प्यार

जाणै समदरिया मे ज्वार

लीन्ही अगडाई कचनार

के पाख पसरगी खुलकै रे

पाख पसरगी मिरमानैणी मत ना जावै टळकै रे

माटी मुळकै रे

पांच दिया री ज्योत मे प्रीतम री पाती बाचै

चवरी चढनी ढळतै स्याळू पीयरिया में पाचै

आमा ऊपर फूट्या बोर

बोरा नीचै नाचै मोर

लुळ लुळ होड कर गणगोर

कै राती चूनड चिलकै रो

चूनड चिलकै रे हाथा मे राची हळदी भळकै रे

माटी मुळकै रे

बाध मोठडो नीबू पीळो आयो सैनानी

पाक्यो धान पधारो थारी घर-घर में मिजमानी

कासा में केसरिया भात

मीठी बाता करती रात

ल्यायो सोना रो परभात

कै टप-टप मोती ढुळकै रे

मोती ढुळकै रे चदा री चादणी बहगी गळकै रे

माटी मुळकै रे

हो माटी मुळकै रे माटी रा माटी कुदरत पुळकै रे

माटी मुळकै रे

स्रोत
  • पोथी : राजस्थान के कवि ,
  • सिरजक : त्रिलोक गोयल ,
  • संपादक : रावत सारस्वत ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी भाषा साहित्य संगम (अकादमी) बीकानेर ,
  • संस्करण : दूसरा संस्करण
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