मैं भावुक हूं
मनै भावना आभै ताणी ले जावै है,
किरणा, धूप, कळी, खुशबू आ
सदा निमंत्रण दे जावै है।
झरणा मनै जगावण आवै
पून गोद में बैठावै है
गरिमा री सनमानित ऊर्जा
भावां में आ रच जावै है,
कदै पेड़ सूं बतळावूं मैं
छांव कनै ही रह जावै है
दसों-दिसावां आकर म्हां सैं
अपणै मन री कह जावै है,
थे साहस हो, थे निष्ठा हो
संकळपां री सीमा हो थे,
थे खुशबू हो, थे किरणां हो
खुद विवेक री गरिमा हो थे,
आकर छायां सुलह करावै
धूप जो अणबण दे ज्यावै है।
साहस मनै श्लोक लिखावै
निष्ठा वां नै याद करावै
उद्देश्यां री भरी सभा में
गतियां आकर राह दिखावै
पौधां सैं मुस्कानां लेवूं
पत्ता धीरज सिखलावै है,
समदर म्हारो हाथ पकड़कर
म्हारै संग में इठलावै है,
आं सैं मैं जीवण लेवूं हूं
जीवण नैं जीवण देवूं हूं
माटी वाळी नाव है पण में
बैं नै पाणी में खेवूं हूं।
नदियां मौन पढ़ावै मनै
लहरां नरतन दे जावै है।