प्रार्थना

जय जय भवानी अम्बिके। करनी तुम्हारी शरण हम।

बहुत सोये गाढ़ निद्रा, (अब) चाहते जागरण हम,
स्वातन्त्रय की तू महासागर, तेरे ही हों निर्झरण हम॥ जय...

क्षात्रबल का उद्धरण माँ। तूने किया अनुसरण हम,
परमार्थ में बलिदान अपना, कर सिखादें मरण हम॥ जय...

संतान सच्चे अभय हों, तेरे ही तारण-तरण हम,
सामर्थ्य दो माँ! कर सकें, यह सिद्ध चारण वरण हम॥ जय...

वाहन तुम्हारा ‘केहरी’, वर मांगता अशरण शरण,
ओ असुर मर्दिनी चंडिके। भूलें न तेरे चरण हम॥ जय...


स्रोत
  • पोथी : माताजी रा छंद ,
  • सिरजक : बारहठ केसरी सिंह ,
  • संपादक : चन्द्र प्रकाश देवल ,
  • प्रकाशक : चारण साहित्य शोध संस्थान प्रकाशन, अजमेर ,
  • संस्करण : प्रथम संस्करण
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