जय जय भवानी अम्बिका, करणी तिहारी म्हे सरण।
भोत सोया गाढ निद्रा, चा’ वां अबै म्हे जागरण।
सुतंतरता री महा सागर, थारा हि हां म्हे निरझरण।
जय जय भवानी अम्बिका, करणी तिहारी म्हे सरण।
राष्ट्र बळ रौ उद्धरण मां, तूं करै म्हे अनुसरण।
परमारथ में बळिदांन निज, करणो सिखाद्यां म्हे मरण।
जय जय भवानी अम्बिका, करणी तिहारी म्हे सरण।
संतान साची अभै व्है, थारा ही म्हे तारण तरण।
साम्रत्थ द्यो में कर सकां, आ सिद्ध म्हे चारण बरण।
जय जय भवानी अम्बिका, करणी तिहारी म्हे सरण।
वाहण तुंहाळौ केसरी, बर मांगवै असरण सरण।
ओ असुर मरदनि चंडिका, भूलां न म्हे थारा चरण।
जय जय भवानी अम्बिका, करणी तिहारी म्हे सरण।