अम्बरपुर मं निपजी खेती
खेती पाणी की अगेती
मतवाळी रे
हाळी चौमासौ ले आयौ
भर-भर गाड़ी रे
गाड़ी मं लाँवण बद्दल कौ
लाँवण मं पाणी समदर कौ
सबनै जाणी रे
गाड़ी हालै तौ झालै ओ
बरसै पाणी रे।
लग गए झड़ धरती पै भइया
बोलै झींगर मोर पपैया
जागी वाणी रे
झरमर बूँद पड़ै दिनरात
डटै नहीं पाणी रे।
ऊपर माथा सूँ निकळगौ
न्यार बरूँ ऊँचौ हो ढळगौ
गैला रोक्या आडौ पड़गौ
परलै फाड़ी रे
लूमै बेल हरी चकरी की न्याड़ी-न्याड़ी रे
गैल गिराड़ा उमक्या डोलै
केंकड़ बीछू बिनमं डोलै
झड़ै औलाणी रे
कैसे जाऊं हो पाणी कू ल्याऊं पाणी रे।