सुणे धाक पतसाहरी वाक पीथल सकंप,

ताहरी मेहळ नवरोज तरणी।

ध्यान धर सगत रो सांकड़ै दाह री,

आंकड़ै माहरी लाज अरणी।

जिकण दिन साचरा बचन कहिया जिकै,

तिकण दिन वाचरा केम तूटै।

इकण दिन वासतै रखै मा तुझइया,

छिकण दिन वासतै हमैं छूटै।

धिवानी दीसरी ध्यान पीथळ धरै,

भवानी बीसरी केम भाळी।

ईसरी लेंवतां डांण आई अठै,

तीसरी देवतां पांण ताळी।

ओळ महाडोळ बिच बैठ देखै अमर,

उमर रमझोळ रंग चोळ ठाळा।

गवन कर जवन चख देख मुटियो गुमर,

चंवर नवहथै कर डमर चाळा।

मंडप धूजै धरर घरर मांची महल,

डहल मांची फरर थरर डाढी।

डबक सुरतांण रो सहर धूज्यो डरर,

करर इम केहरी हथळ काढी।

सांकड़ै अराध्यां किता कज सारणी,

बिघन दुख भांजणी बेद बाया।

सेवगां तारणी निमो ऊदल सदू,

मां निमो चारणी जोग माया।

कच्छ धर चराड़व हुंती संकर कहै,

आगरै आप सैं जोस आई।

बैण पीथल तणा बीकपुर बधारे,

बोम सुण पधारे राज बाई।

स्रोत
  • पोथी : राजस्थानी शक्ति काव्य ,
  • सिरजक : शंकरदान सामौर ,
  • संपादक : भंवरसिंह सामौर ,
  • प्रकाशक : साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली ,
  • संस्करण : द्वितीय
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