हजारी म्हारी भैंस जतरगी

भैंस जतरगी देखी के?

लारै-लारै ही पडरेट

लवारी देखी के?

को देखी भाई कांई होवै

झूंठी बात बणाबा सूं

घर सूं भाज गई

भाज गई है रामा सूं

बताऊं कांई भैंस टुड़ागी

भैंस टुड़ागी खूंटा सूं

न्यार पै लपकै ही

पाटोड़ पै भरोटा सूं

म्हाटा की भारी होगी यातो

तो जिस्यो सुदामा सूं

कांई रिह्यो होगो

घर मं लगा खाबा कू

मत पूछै भाई भैंस जतरगी

भैंस जतरगी जैंना सूं

म्हारा छोटा-छोटा

बाळक रहगा धैंणा सूं

हेरयायो तू सब जगरोटी

जगरोटी सूं खां जावैगी

कोई लेगो होगो

नंई कांई धरती खावैगी

पाछां सूं दुनिया भेड़ै रै

कुमाई ठाडी खेतन मं

कुमाई ठाडी खेतन मं

म्हारी मातर डोल करादी

दो भैंसन नै।

स्रोत
  • पोथी : कथेसर राजस्थानी तिमाही ,
  • सिरजक : प्रभात ,
  • संपादक : रामस्वरूप किसान
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